IUNNATI CHANAKYA NITI CHANAKYA NITI

CHANAKYA NITI

 चाणक्य नीति ⚔️

✒️ तृतीय अध्याय

श्लोक : १०

त्यजेदेकं कुलस्यार्थे ग्रामस्यार्थ कुल त्यजेत्।

ग्रामं जनपदस्याअ्र्थे आत्माअ्र्थे पृथिवीं त्यजेत्।।१०।।

♦️भावार्थ – कुल के लिए अगर व्यक्ति को छोड़ना पड़े तो ख़ुशी-ख़ुशी छोड़ देना चाहिए। गाँव के हित के लिए ज़रूरत पड़े तो कुल को त्याग देना चाहिए। जनपद के लिए गाँव को छोड़ देना चाहिए और स्वयं के लिए पुरी पृथ्वी का त्याग कर देना चाहिए।।

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