IUNNATI CHANAKYA NITI चाणक्य नीति 

चाणक्य नीति 

चाणक्य नीति ⚔️ 

✒️ द्वितीय अध्याय 

♦️श्लोक :- ९

शैले-शैले न माणिक्यं मौक्तिकं न गजे-गजे। 

साधवे न हि सर्वत्र चन्दनं न वने-वने।।९।। 

♦️भावार्थ — हर पहाड़ पर माणिक नहीं मिलते। प्रत्येक हाथी के सर पर मोती नहीं होते। सज्जन लोग सब जगह नहीं होते और सभी वनों में चंदन नहीं होता।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

CHANAKYA NITI FAMILY LESSONCHANAKYA NITI FAMILY LESSON

चाणक्य नीति   तृतीय अध्याय  श्लोक : १८ लालयेत् पञ्च वर्षाणि दश वर्षाणि ताडयेत्।  प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत्।।१८।।  भावार्थ – पाँच साल तक लाड़-प्यार, दस साल तक सख़्ती और

चाणक्य नीति – श्लोक व भावार्थचाणक्य नीति – श्लोक व भावार्थ

चाणक्य नीति    द्वितीय अध्याय  श्लोक :- १३  श्लोकेन वा तदर्धेन पादेनैकाक्षरेण वा।  अबन्ध्यं दिवसं कुर्याद् दानाध्ययन कर्मभिः।।१३।।  भावार्थ — एक श्लोक का अध्ययन, चिंतन, मनन से या आधे श्लोक द्वारा

CHANAKYA NITICHANAKYA NITI

चाणक्य नीति ⚔️  तृतीय अध्याय  ♦️श्लोक : १५  एकानाअ्पि सुपुत्रेण विद्यायुक्तेन साधुना।  आह्लादितं कुलं सर्वं यथा चन्द्रेण शर्वरी।।१५।। ♦️भावार्थ – जैसे चन्द्र के उदय होने पर रात का घनघोर अंधेरा