IUNNATI CHANAKYA NITI CHANAKYA NITI SHLOK

CHANAKYA NITI SHLOK

चाणक्य नीति ⚔️

✒️ तृतीय अध्याय 

श्लोक : ११ 

उद्योगे नास्ति दारिद्रयं जपतो नास्ति पातकम्। 

मौने च कलहो नास्ति नास्ति जागरिते भयम्।।११।। 

भावार्थ – परिश्रम करने पर गरीबी नहीं रहती। मंत्र के जाप से पाप नहीं रहता। मौन रहने पर कलह नही होता। जागृत रहने पर भय नही रहता। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

चाणक्य नीतिचाणक्य नीति

चाणक्य नीति   द्वितिय अध्याय  श्लोक :- १६  बलं विद्या च विप्राणां राज्ञां सैन्यं बलं तथा। बलं वित्तं च वैश्यानां शुद्राणां परिचचर्यिकम्।।१६।।  भावार्थ — विद्वानों का बल विद्या है, राजाओं का

चाणक्य नीतिचाणक्य नीति

चाणक्य नीति    तृतीय अध्याय  श्लोक : २०  धर्मार्थकाममोक्षाणां यस्यैकोअ्पि न विद्यते।  जन्म-जन्मनि मर्त्येषु मरणं तस्य केवलम्।।२०।।  भावार्थ – मनुष्य देह धारण करने पर भी जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष

चाणक्य नीति चाणक्य नीति 

चाणक्य नीति    द्वितीय अध्याय  श्लोक :- ९ शैले-शैले न माणिक्यं मौक्तिकं न गजे-गजे।  साधवे न हि सर्वत्र चन्दनं न वने-वने।।९।।  भावार्थ — हर पहाड़ पर माणिक नहीं मिलते। प्रत्येक हाथी