IUNNATI CHANAKYA NITI चाणक्य नीति

चाणक्य नीति

चाणक्य नीति ⚔️

✒️ द्वितिय अध्याय 

♦️श्लोक :- १६ 

बलं विद्या च विप्राणां राज्ञां सैन्यं बलं तथा।

बलं वित्तं च वैश्यानां शुद्राणां परिचचर्यिकम्।।१६।। 

♦️भावार्थ — विद्वानों का बल विद्या है, राजाओं का बल सेना व्यापारियों का बल धन और अशिक्षितों का बल सेवा है।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

CHANKAYA NITICHANKAYA NITI

 चाणक्य नीति    तृतीय अध्याय  श्लोक : १४  एकेनाअ्पि सुवृक्षेण पचष्पितेन सुगन्धिना। वासितं तद्वनं सर्वं सुपुत्रेण कुलं तथा।।१४।। भावार्थ – पुष्पों से लदे और उत्तम सुगन्ध से युक्त एक ही पेड़

चाणक्य नीतिचाणक्य नीति

चाणक्य नीति    तृतीय अध्याय  श्लोक : २०  धर्मार्थकाममोक्षाणां यस्यैकोअ्पि न विद्यते।  जन्म-जन्मनि मर्त्येषु मरणं तस्य केवलम्।।२०।।  भावार्थ – मनुष्य देह धारण करने पर भी जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष

 चाणक्य नीति  चाणक्य नीति 

 तृतीय अध्याय  श्लोक :- ७ मूर्खस्तु परिहर्तव्यः प्रत्यक्षो द्विपदः पशुः।  भिनत्ति वाक्शल्येन अदृष्टः कण्टको यथा।।७।।  भावार्थ — मूर्ख का हमेशा त्याग कर देना चाहिए, क्यों कि वह दो पैरों वाले