IUNNATI CHANAKYA NITI CHANAKYA NITI SHLOK

CHANAKYA NITI SHLOK

चाणक्य नीति ⚔️

✒️ तृतीय अध्याय

♦️श्लोक : १३

को हि भारः समर्थानां किं दूरं व्यवसायिनाम्।

को विदेशाः सविद्यानां कः परः प्रियवादिनाम्।।१३।।

♦️भावार्थ – समर्थ व्यक्ति के लिए कौन-सा कार्य मुश्किल है? व्यापारी के लिए कौन-सी जगह दूर है? विद्यावान के लिए विदेश क्या है? मीठा बोलने वाले के लिए कौन पराया है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

CHANAKYA NITICHANAKYA NITI

चाणक्य नीति   तृतीय अध्याय  श्लोक : २१ मूर्ख यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसञ्चितम्।  दम्पत्येः कलहो नाअ्स्ति तत्र श्रीः स्वयमागता ।।२१।।  भावार्थ – जिस जगह मूर्ख पूजित नहीं होते और

 CHANAKYA NITI IN HINDI CHANAKYA NITI IN HINDI

 चाणक्य नीति    द्वितीय अध्याय  श्लोक :- १३  श्लोकेन वा तदर्धेन पादेनैकाक्षरेण वा।  अबन्ध्यं दिवसं कुर्याद् दानाध्ययन कर्मभिः।।१३।।  भावार्थ — एक श्लोक का अध्ययन, चिंतन, मनन से या आधे श्लोक द्वारा

चाणक्य नीतिचाणक्य नीति

चाणक्य नीति   द्वितीय अध्याय श्लोक : २ भोज्य भोजनशक्तिश्च रतिशक्तिर्वराङ्गना। विभवो दानशक्तिश्च नाअ्ल्पस्य तपसः फलम्।।२।। भावार्थ — खाने-पीने की चीजों का सुलभ होना, खाने-पीने की क्षमता होना, भोग-विलास की ताकत