IUNNATI CHANAKYA NITI CHANAKYA NITI

CHANAKYA NITI

चाणक्य नीति ⚔️ 

✒️ द्वितीय अध्याय 

♦️श्लोक :- १२ 

लालनाद् बहवो दोषास्ताडनाद् बहवो गुणाः। 

तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्न तु लालयेत्।।१२।। 

♦️भावार्थ — प्यार-दुलार से बेटे और शिष्य में बहुत से दोष पैदा हो जाते हैं, जबकि ताड़ना (डांँट-फटकार) से उनका विकास होता हे। अतः संतति और शिष्यों को डाँटते रहना चाहिये। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

चाणक्य नीति चाणक्य नीति 

चाणक्य नीति    द्वितीय अध्याय  श्लोक :- ९ शैले-शैले न माणिक्यं मौक्तिकं न गजे-गजे।  साधवे न हि सर्वत्र चन्दनं न वने-वने।।९।।  भावार्थ — हर पहाड़ पर माणिक नहीं मिलते। प्रत्येक हाथी

चाणक्य नीतिचाणक्य नीति

चाणक्य नीति   द्वितिय अध्याय  श्लोक :- १६  बलं विद्या च विप्राणां राज्ञां सैन्यं बलं तथा। बलं वित्तं च वैश्यानां शुद्राणां परिचचर्यिकम्।।१६।।  भावार्थ — विद्वानों का बल विद्या है, राजाओं का

चाणक्य सूत्रचाणक्य सूत्र

चाणक्य नीति दैनिक अध्याय  ।। अथ: चाणक्य सूत्रं प्रारभ्यते ।। 【चाणक्य सूत्र】 चाणक्य सूत्र : २१७ ॥ न दुर्जनैः सह संसर्गः कर्त्तव्यः ।। भावार्थ:- बुद्धिमान व्यक्तियों को दुष्ट लोगों से