IUNNATI CHANAKYA NITI CHANAKYA NITI

CHANAKYA NITI

चाणक्य नीति ⚔️ 

✒️ द्वितीय अध्याय 

♦️श्लोक :- १२ 

लालनाद् बहवो दोषास्ताडनाद् बहवो गुणाः। 

तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्न तु लालयेत्।।१२।। 

♦️भावार्थ — प्यार-दुलार से बेटे और शिष्य में बहुत से दोष पैदा हो जाते हैं, जबकि ताड़ना (डांँट-फटकार) से उनका विकास होता हे। अतः संतति और शिष्यों को डाँटते रहना चाहिये। 

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