IUNNATI CHANAKYA NITI CHANAKYA NITI IN HINDI

CHANAKYA NITI IN HINDI

 चाणक्य नीति 

 तृतीय अध्याय

श्लोक : ९

 कोकिलानां स्वरो रूपं स्त्रीणां रूपं पतिव्रतम्।विद्या रूपं कुरूपाणां क्षमा रूपं तपस्विनाम्।।९।।

भावार्थ-– कोयल की सुंदरता उसकी वाणी है, स्त्री की सुंदरता उसका पतिव्रत धर्म है। कुरूप का सौंदर्य विद्या है और तपस्वी की सुंदरता क्षमा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

CHANAKYA NITI SANSKRIT SHLOKCHANAKYA NITI SANSKRIT SHLOK

चाणक्य नीति   तृतीय अध्याय श्लोक:-१२ अतिरूपेण वै सीता अतिगर्वेण रावणः। अतिदानात् वालिबद्धो अति सर्वत्र वर्जयेत्।।१२।। भावार्थ – अधिक सुन्दरता ही माँ सीता के अपहरण का कारण हुआ, अधिक गर्व से

CHANAKYA NITICHANAKYA NITI

चाणक्य नीति   तृतीय अध्याय  श्लोक : १६  एकेन शुष्कवृक्षेण दह्यमानेन विह्निना। दह्यते तद्वनं सर्वं कुपुत्रेण कुलं यधा।।१६।। भावार्थ – जंगल में आग लगने पर जैसे वहाँ का एक ही सूखा

 चाणक्य नीति  चाणक्य नीति 

 तृतीय अध्याय श्लोक :- ६ प्रलये भिन्नमर्यादा भवन्ति किल सागराः।  सागरा भेदमिच्छन्ति प्रलयेअ्पि न साधवः।।६।।  भावार्थ — प्रलय काल में सागर भी अपनी मर्यादा को छोड़ देता है। वह तटों