IUNNATI CHANAKYA NITI CHANAKYA NITI LIFE LESSON

CHANAKYA NITI LIFE LESSON

चाणक्य नीति ⚔️ 

✒️ तृतीय अध्याय 

♦️श्लोक : १७

किं जातैर्बहुभिः पुत्रैः शोकसन्तापकारकैः।

वरमेकः कुलाअ्अ्लम्बी यत्र  विश्राम्यते कुलम्।।१७।।

♦️भावार्थ – अपने बुरे आचरण से शोक और संताप उत्पन्न करने वाली बहुत-सी संतानों से, कुल को ऊँचा उठाने वाली और कुल के अन्य सदस्यों को आनन्द पहुँचाने वाली एक ही संतान अच्छी है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

CHANAKYA NITICHANAKYA NITI

चाणक्य नीति   तृतीय अध्याय  श्लोक : २१ मूर्ख यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसञ्चितम्।  दम्पत्येः कलहो नाअ्स्ति तत्र श्रीः स्वयमागता ।।२१।।  भावार्थ – जिस जगह मूर्ख पूजित नहीं होते और

 चाणक्य नीति चाणक्य नीति

 चाणक्य नीति   द्वितीय अध्याय  श्लोक :- ११  माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः।  न शोभते सभामध्ये बको यथा ।।११।।  भावार्थ — ऐसे माँ-बाप अपनी संतान के दुश्मन है

चाणक्य नीतिचाणक्य नीति

चाणक्य नीति   द्वितीय अध्याय श्लोक:-१८ गृहीत्वा दक्षिणां विप्रास्त्यजन्ति यजमानकम्। प्राप्तविद्या गुरुं शिष्या दग्धाअ्रण्यं मृगास्तथा।।१८।। भावार्थ– पुरोहित दक्षिणा लेकर यजमान को छोड़ देते हैं, शिष्य विद्या प्राप्ति के बाद गुरु-दक्षिणा देकर