IUNNATI CHANAKYA NITI CHANKAYA NITI

CHANKAYA NITI

 चाणक्य नीति ⚔️ 

✒️ तृतीय अध्याय 

श्लोक : १४ 

एकेनाअ्पि सुवृक्षेण पचष्पितेन सुगन्धिना।

वासितं तद्वनं सर्वं सुपुत्रेण कुलं तथा।।१४।।

♦️भावार्थ – पुष्पों से लदे और उत्तम सुगन्ध से युक्त एक ही पेड़ से जिस तरह पूरा वन सुशोभित हो जाता है, उसी तरह उत्तम गुणों से युक्त एक ही संतान से पूरा कुल शोभायमान हो जाता 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

CHANAKYA NITI SHLOKCHANAKYA NITI SHLOK

चाणक्य नीति   तृतीय अध्याय  श्लोक : ११  उद्योगे नास्ति दारिद्रयं जपतो नास्ति पातकम्।  मौने च कलहो नास्ति नास्ति जागरिते भयम्।।११।।  भावार्थ – परिश्रम करने पर गरीबी नहीं रहती। मंत्र के

 चाणक्य नीति  चाणक्य नीति 

 तृतीय अध्याय  श्लोक :- ७ मूर्खस्तु परिहर्तव्यः प्रत्यक्षो द्विपदः पशुः।  भिनत्ति वाक्शल्येन अदृष्टः कण्टको यथा।।७।।  भावार्थ — मूर्ख का हमेशा त्याग कर देना चाहिए, क्यों कि वह दो पैरों वाले

CHANAKYA NITI LIFE LESSONCHANAKYA NITI LIFE LESSON

चाणक्य नीति    तृतीय अध्याय  श्लोक : १७ किं जातैर्बहुभिः पुत्रैः शोकसन्तापकारकैः। वरमेकः कुलाअ्अ्लम्बी यत्र  विश्राम्यते कुलम्।।१७।। भावार्थ – अपने बुरे आचरण से शोक और संताप उत्पन्न करने वाली बहुत-सी संतानों