IUNNATI CHANAKYA NITI चाणक्य नीति

चाणक्य नीति

चाणक्य नीति  

 द्वितीय अध्याय 

श्लोक :- १५

नदी तीरे च ये वृक्षाः परगृहेषु कामिनी। 

मन्त्रिहीनश्च राजानः शीघ्रं नश्यन्त्नसंशयम्।।१५।। 

भावार्थ — नदी के तट के पेड़, दूसरे के घर में रहने वाली सुंदर महिला तथा मंत्री हीन राजा-ये बहुत जल्दी नष्ट हो जाते हैं, इस बारे में कोई संदेह नहीं है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

CHANAKYA NITI SHLOKCHANAKYA NITI SHLOK

चाणक्य नीति   तृतीय अध्याय श्लोक : १३ को हि भारः समर्थानां किं दूरं व्यवसायिनाम्। को विदेशाः सविद्यानां कः परः प्रियवादिनाम्।।१३।। भावार्थ – समर्थ व्यक्ति के लिए कौन-सा कार्य मुश्किल है?

CHANAKYA NITI LIFE LESSONCHANAKYA NITI LIFE LESSON

चाणक्य नीति    तृतीय अध्याय  श्लोक : १७ किं जातैर्बहुभिः पुत्रैः शोकसन्तापकारकैः। वरमेकः कुलाअ्अ्लम्बी यत्र  विश्राम्यते कुलम्।।१७।। भावार्थ – अपने बुरे आचरण से शोक और संताप उत्पन्न करने वाली बहुत-सी संतानों

CHANAKYA NITI SHLOKCHANAKYA NITI SHLOK

चाणक्य नीति   तृतीय अध्याय  श्लोक : ११  उद्योगे नास्ति दारिद्रयं जपतो नास्ति पातकम्।  मौने च कलहो नास्ति नास्ति जागरिते भयम्।।११।।  भावार्थ – परिश्रम करने पर गरीबी नहीं रहती। मंत्र के